अपनों के सताए बुजुर्गो को भंगरोटू वृद्धाश्रम बीते 34 साल से सहारा दे रहा
नेरचौक।
अपनों के सताए बुजुर्गो को भंगरोटू वृद्धाश्रम बीते 34 साल से सहारा दे रहा है। जीवन संध्या की दहलीज पर पहुंचे बुजुर्ग वृद्धाश्रम में परिवार के साथ जी रहे हैं। यहां रहने वाले बुजुर्गो की कहानियां दिल को दहलाने वाली है। बेटे की मौत पर बहू ने जहां सास को घर से बाहर निकाल दिया तो, वहीं किसी को उनके बेटों ने घायल अवस्था में अस्पताल के बाहर मरने के लिए छोड़ दिया। बुजुर्ग इसके बावजूद भी अपने बच्चों के लिए दुआ मांग रहे हैं।
बल्ह वैली कल्याण सभा की शुरुआत 1986 में उस समय हुई जब प्रदेश भर में न तो सरकारी स्तर पर व न ही निजी स्तर पर ऐसी कोई संस्था थी। क्षेत्र के कुछ बुद्धिजीवी व्यक्तियों ने आने वाले समय की दस्तक को भांप लिया था, जिस को देखते हुए बल्ह वैली कल्याण सभा का गठन किया गया। वर्तमान में वृद्धाश्रम में 25 बुजुर्गो के रहने की व्यवस्था है, लेकिन फिलहाल यहां पर 17 बुजुर्ग जीवन यापन कर रहे हैं। संस्था के कर्मचारी इनकी दिल से सेवा करते हैं। सुबह छह बजे चाय, नौ बजे नाश्ता ,12 बजे दोपहर का भोजन, फिर दो बजे चाय बिस्कुट, चार बजे फल व सात बजे रात का भोजन दिया जाता है। समय-समय पर बुजुर्गो का मनोरंजन भी करवाया जाता है। हर त्योहार को मिल जुलकर मनाया जाता है। किसी प्रकार की कोई बीमारी आदि होती है तो यहां पर चिकित्सक निरंतर चेकअप करते हैं।
नेपाल के डेंगू राम यहां पिछले एक साल से हैं। मनाली में किसी होटल में सारी जिंदगी काम किया, इन्हें गठिया की बीमारी हो गई। जब काम के नही रहे तो परिवार के सदस्य यहां छोड़ गए। मंडी की 73 साल की विद्या देवी भी बीमारी से पीड़ित है। बेटे की 20 वर्ष पहले बीमारी से मौत हो गई। बहू ने कुछ दिनों के बाद जब घर से बाहर निकाल दिया तब वृद्धाश्रम को ही अपना घर बना लिया। पनारसा के दिल बहादुर सड़क दुर्घटना में घायल हो गए। बेटे ने गाड़ी से मंडी अस्पताल तक पहुंचाया इसके लिए बेटे ने किराया भी वसूल कर लिया। अस्पताल के बाहर छोड़ कर बेटा चला गया। उसके बाद कभी भी हाल जानने नहीं आया। बल्ह घाटी के लूणापानी की रहने वाली महिला को किसी तरह वृद्ध आश्रम में पहुंचाया। टांग टूटी हुई थी। उपचार के बाद बैसाखियों के सहारे चलना शुरू किया, लेकिन आज बिना बैसाखियों के चल फिरने में समर्थ है। सरकार की ओर से जो अनुदान दिया जाता है उसका 20 प्रतिशत सभा को देना पड़ता है। सरकार की ओर से करीब दस लाख रुपये की राशि अनुदान के रूप में दी जाती है। 12 से 13 लाख रुपये सालाना एकत्रित होता है, जबकि खर्च 16 से 20 लाख हो जाता है। जिसे दानी सज्जनों के माध्यम से संस्था पूरा कर पा रही है।
बुजुर्गोको हर प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जा रही है। इनकी सेवा के लिए आश्रम में एक प्रबंधक, भोजन बनाने के लिए दो सहायक, रसोईया एक, व सफाई कर्मचारी रखे गए हैं।
डा.दिनेश वशिष्ठ, प्रधान बल्ह वैली कल्याण सभा
