कडक़नाथ के चूजे बंटे नहीं कैसे दूर होगा कुपोषण
सतना,
काले सोने के रूप में पहचान बना चुके कडक़नाथ के चूजे आखिर आदिवासियों को कब मिलेंगे। अब इसका इंतजार उन्हें खलने लगा है। पिछले लगभग चार साल से पशुपालन विभाग द्वारा कडक़नाथ के चूजे वितरित नहीं किए गए हैं। अब सवाल यह है कि आखिर ऐसे में कुपोषण कैसे दूर होगा और आदिवासियों की माली हालत कैसे सुरधरेगी। बताया गया है कि मझगवां एवं उचेहरा ब्लॉक के चयनित ग्रामों में आदिवासियों को लगभग डेढ़ सौ यूनिट के ज्यादा कडक़नाथ के चूजे वितरित करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन सप्लाई न होने के कारण हितग्राही तीन साल से इंतजार कर रह गए। जानकारों के अनुसार 2018 से हितग्राहियों को कडक़नाथ इकाई नहीं बटी है। उल्लेखनीय है कि जिले में पनप रहे कुपोषण को मिटाने एवं अनुसूचित जनजाति के चयनित हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए पशुपालन विभाग ने अनुदान पर कडक़नाथ के चूजे प्रदाय करने की योजना जिले में बनाई थी। अन्य नस्ल की अपेक्षा कडक़नाथ किस्म का मुर्गा दुगने या तिगुने दामों में बिकता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होने के कारण कुपोषण को मिटाने में सहायक है। इस बारे में उप संचाल पशु चिकित्सा सेवा डॉ. पीके शर्मा ने कहा कि सही है कि पिछले कुछ सालों से कडक़नाथ चूजे हितग्राहियों को नहीं मिल पाए हैं। इसी माह के अंदर ही कडक़नाथ के चूजे मंगाकर वितरित करवाए जाएंगे। इसके लिए तैयारी तेज कर दी गई है।
