कन्यादान योजना घोटाला : आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो ने तैयार किया आरोप पत्र, जांच में चौंकाने वाले तथ्य
भोपाल,
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना इस मंशा के साथ प्रारंभ की थी कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को सहायता मिल जाए और बच्चियों की धूमधाम से शादी हो जाए लेकिन प्रदेश के अधिकारी इस योजना में पलीता लगाने से बिलकुल भी बाज नहीं आ रहे हैं। वे अपात्रों के नाम से पैसे निकालकर योजना को बदनाम करने में तुले हैं। विदिशा की सिरोंज जनपद पंचायत में कोरोना काल में पांच हजार 923 विवाह प्रकरण स्वीकृत करके 30 करोड़ 18 लाख 39 हजार रुपए का भुगतान कर दिया गया। जबकि वास्तव में इतने विवाह हुए ही नहीं। आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो ने मामला पंजीबद्ध करते हुए जनपद के सीईओ व दो कम्प्यूटर ऑपरेटरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले में ईओडब्ल्यू को जांच-पड़ताल में जो त्थ्य सामने आए वह चौंकाने वाले हैं। विवाह योजना के अंतर्गत 6000 से अधिक प्रकरण स्वीकृत किए गए, पर इनमें से 2500 के ही दस्तावेज मिले हैं, 3500 से अधिक प्रकरणों के दस्तावेज गायब कर दिए गए। जिसके चलते 15 करोड़ से अधिक के घोटाले की पुष्अि हुई है। इस मामले में भी ईओडब्ल्यू मामला दर्ज करेगी। उल्लेखनीय है कि यह मामला विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सिरोंज से भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा ने उठाया और विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने श्रम मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह को जांच कराने के आदेश दिए। उधर, मुख्यंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्रम विभाग की समीक्षा के दौरान विदिशा जिलाधीश उमाकांत भार्गव को फोन लगाकर इस घोटाले में नाराजगी जताई और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) शोभित त्रिपाठी को निलंबित कर दिया। सीईओ ने शादियों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर 30 करोड़ से ज्यादा का भुगतान करा दिया था। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) द्वारा तैयार की गई चार्जशीट के मुताबिक वर्ष 2019 से 2021 के बीच सरकार की विवाह योजना के अंतर्गत 6000 से अधिक प्रकरण स्वीकृत किए गए, पर इनमें से 2500 के ही दस्तावेज मिले हैं। जांच में यह पता चला है कि घोटाले को अंजाम देने 70 साल से अधिक के कई बुजुर्गों के नाम से फर्जी श्रमिक कार्ड बनवाए गए। इसके लिए इनमें आधार कार्ड, बैंक पास बुक समेत अन्य दस्तावेज लिए गए। कई व्यापारियों, किसानों समेत अन्य लोगों के फर्जी श्रमिक कार्ड बनाकर विवाह प्रकरण स्वीकृत किए। 27 से 30 साल के युवाओं के तीन से चार साल के बच्चों की शादी के फर्जी प्रकरण बनाए और राशि निकाली। जांच में यह भी पता चला है कि अन्य जनपद पंचायतों की तुलना में 13 गुना अधिक विवाह प्रकरण स्वीकृत कर फर्जीवाड़ा किया गया। जिन लोगों ने दस्तावेज लिए गए, उन्हें विवाह योजना की राशि में से पांच हजार रुपए दिए, शेष राशि में से बड़ा हिस्सा शोभित त्रिपाठी को मिला। ऑपरेटर्स को भी पांच से दस हजार रुपए प्रति प्रकरण दिए। कई ऐसे पीडि़त मिले, जिन्हें पता ही नहीं था कि उनके नाम से शासन की योजना के तहत रुपए निकाले गए हैं। इनमें ऐसे कई लोग शामिल हैं, जिनकी शादी पहले ही हो चुकी थी। उनके नाम पर भी सरकारी सहायता राशि निकाली गई है। यह पैसा मुख्यमंत्री विवाह योजना के अंतर्गत निकाला गया। कोरोना काल में एसडीएम ने 3500 जोड़ों की शादियों के नाम पर सरकारी पैसा निकाला है। जांच में सामने आया कि 27 साल के युवक की तीन बेटियों की शादी करा दी गई। तीनेां के नाम पर 51-51 हजार रुपए स्वीकृत कर पैसा निकाल लिया गया
