कांग्रेस ने कभी आदिवासी, दलित महिलाओं को नेतृत्व का अवसर नहीं दिया
भोपाल,
दलित महिला हितों की बात करती है लेकिन उन्हें नेतृत्व का अवसर नहीं दिया जाता। भाजपा की ओर से उमा भारती मुख्यमंत्री रहीं हैं। सुमित्रा महाजन ताई को लोकसभा अध्यक्ष बनाकर सम्मान दिया गया है। अनेक महिला नेताओं को केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल बनने का अवसर भी दिया गया। राजमाता विजयाराजे सिंधिया जैसी नेता भी भाजपा में सक्रिय रही हैं जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर तूती बोलती थी। इसी तरह सुषमा स्वराज ने भी दो लोकसभा चुनाव मध्य प्रदेश से लड़े हैं। उनकी प्रेरणा से भी कई महिलाएं भाजपा की ओर आकर्षित हुई हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने आदिवासी मुख्यमंत्री बनने के दावेदार शिव भानू सिंह सोलंकी का रास्ता रोककर जता दिया कि वह इस वर्ग की कितनी हितैषी हैं। महिलाओं के मामले में भी प्रदेश में किसी भी महिला को मुख्यमंत्री बनने का अवसर नहीं मिला है। जमुना देवी को जरूर उप मुख्यमंत्री बनाया गया लेकिन उन्हें पर्याप्त अधिकार नहीं दिए गए थे जिसके कारण वे नाराज रहती थीं। जाहिर है कि कांग्रेस ने महिलाओं के नेतृत्व में सत्ता में पर्याप्त भागीदारी नहीं दी। इसी का परिणाम है कि महिलाओं में भाजपा की लोकप्रियता अधिक है। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और उसके अनुषांगिक संगठन लगातार युवाओं को आकर्षित करते रहते हैं। संघ ने तरुण स्वयंसेवकों की शखा में लाने के लिए अभियान चलाए जाते हैं। बजरंग दल, हिंदू जागरण मंच और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भी युवाओं को आकर्षित करते हैं। दूसरी ओर राष्ट्र सेविका समिति, दुर्गा वाहिनी, संस्कार भारती जैसे संगठन महिलाओं के बीच काम करते हैं और उन्हें नेतृत्व के लिए तैयार करते हैं। इन संगठनों के कामकाज का अंतत: भाजपा केा लाभ मिलता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपना अंदाज बदला है। इसी तरह महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं। इसमें किसी भी राजनीतिक विश्लेषक को संदे नहीं कि भाजपा का महिला मोर्चा महिला कांग्रेस के मुकाबले अधिक प्रभावी और ताकतवर है। भाजपा महिला मोर्चा को मजबूत करने के लिए सीहोर से एक बड़ा प्रशिक्षण शिविर चल रहा है, जिसें अनेक प्रमुख राष्ट्रीय नेता भाग ले रहे हैं। भाजपा के पास महिला नेताओं का नेतृत्व भी बहुतायत में मौजूद है। इसलिए कांग्रेसी महिला मतदाताओं को आकर्षित करने में पीछे नहीं रहना चाहती। जहां तक भाजपा का प्रश्न है तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रदेश की महिलाओं में लोकप्रियता जानी-मानी है। यही वजह है कि शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में जब भी विधानसभा चुनाव होते हैं महिलाओं की लंबी-लंबी कतारें मतदान केंद्र तक लगती हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान महिला वोटरों के महत्व को जानते हैं इसी कारण से वे अपने संबोधन में सीधा महिलाओं से संवाद करते हैं। भाजपा की महिला मोर्चा और प्रदेश् महिला कांग्रेस की तुलना करें तो भाजपा महिला मोर्चा कहीं अधिक सशक्त है। भाजपा के पास महिला नेताओं की बड़ी टीम है। जिनमें विधायक और सांसद भी बहुतायत में हैं। जबकि कांग्रेस की महिला नेता उतनी प्रभावी नहीं हैं। मालवा और निमाड़ की ही बात करें तो कांग्रेस के पास डॉक्टर विजय लक्ष्मी साधौ, झूमा सोलंकी के रूप में दो विधयक हैं। जबकि भाजपा के पास इस अंचल में अनेक विधायक और महिला नेता हैं। इनमें उषा ठाकुर तो प्रदेश में संस्कृति और पर्यटन मंत्री हैं। इनके अलावा नीना वर्मा, सुलोचना रावत, सुमित्रा देवी कास्डेकर, गायत्री पवार, मालिनी गौड़ विधायक हैं। भाजपा के पास सुमित्रा ताई, रंजना बघेल, निर्मला भूरिया, अर्चना चिटनीस, मंजू दादू जैसी महिला नेता भी हैं। जाहिर है भाजपा के पास महिला नेताओं की मजबूत टीम है। युवाओं को आकर्षित करने के मामले में भी कांग्रेस अखिल भारतीय स्तर पर भी युवाओं को आकर्षित नहीं कर पा रही है लेकिन प्रदेश में स्थिति और भी खराब है। कांग्रेस के दोनों बड़े नेता कमलनाथ और दिग्विजय सिंह क्रमश: 74 और 71 वर्ष के हैं। यह दोनों पिछले चार दशकों से कांग्रेस की राजनीतिक में छाए हुए हैं। ऐसे में युवा पीढ़ी के पास कोई मौका नहीं है। दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ही टभी 51 वर्ष के हैं। उन्हें 49 वर्ष की उम्र में प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया था। भाजपा के पास राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रहलाद पटेल जैसी नेता भी हैं जो युवाओं में लोकप्रिय हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए भी उनका कार्यकाल अभी तक याद किया जाता है। कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, अजय विश्नोई ओर नरेंद्र सिंह तोमर जैसे नेता भाजपा के पास हैं जिन्होंने लंबे समय तक भाजयुमो में काम कर युवाओं को जोड़ा है। इन सभी नेताओं को युवाओं के मनोविज्ञान की अच्छी जानकारी है। भाजपा ने युवाओं को मौके भी दिए हैं। जबकि कांग्रेस युवाओं को बढ़ावा नहीं दे रही है। यह स्थिति तब है जब उसके दो बड़े नेता रहाुल गांधी और प्रियंका गांधी युवा हैं।
