भाजपा नेताओं ने किस संवैधानिक अधिकार से बांटे नियुक्ति पत्र, मंत्री धन सिंह रावत जवाब दें: भूपेंद्र सिंह भोज

अल्मोड़ा

कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की मौजूदगी में भाजपा पदाधिकारियों द्वारा नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाने पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज ने कड़ी आपत्ति जताई है। बीते सोमवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम हुआ था जिस पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्री डॉ. धन सिंह रावत बताएं कि उन्होंने भाजपा नेताओं को किस संवैधानिक और वैधानिक अधिकार के तहत सरकारी नियुक्ति पत्र वितरित करने की अनुमति दी। भोज ने कहा कि सरकारी नियुक्तियां संविधान, कानून और निर्धारित चयन प्रक्रिया के अनुसार संबंधित विभागों द्वारा दी जाती हैं। नियुक्ति पत्र किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि युवाओं की मेहनत, योग्यता और पारदर्शी चयन प्रक्रिया का परिणाम होते हैं। ऐसे अवसरों का राजनीतिक प्रचार के लिए उपयोग युवाओं के सम्मान के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार और पार्टी संगठन के बीच की सीमाएं समाप्त करने का प्रयास कर रही है। सरकारी योजनाओं, कार्यक्रमों और नियुक्तियों का राजनीतिक लाभ लेने के लिए उनका इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता के लिए गंभीर चिंता का विषय है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि यदि यह सरकारी कार्यक्रम था तो नियुक्ति पत्र केवल अधिकृत सरकारी अधिकारियों द्वारा वितरित किए जाने चाहिए थे। यदि भाजपा पदाधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी तो सरकार सार्वजनिक रूप से बताए कि इसके लिए कौन-सा सरकारी आदेश जारी किया गया और किस नियम के तहत उन्हें यह अधिकार दिया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा युवाओं के बीच यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि सरकारी नौकरियां उसकी कृपा से मिलती हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां संविधान और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के तहत होती हैं, किसी राजनीतिक दल की मेहरबानी से नहीं। भूपेंद्र सिंह भोज ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से पूरे मामले पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा नेताओं ने बिना किसी वैधानिक अधिकार के सरकारी नियुक्ति पत्र वितरित किए हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *