स्लाटर हाउस में काम करने वाले श्रमिको का वैरीफिकेेशन करने में पुलिस बरत रही ढिलाई
उन्नाव
बीते वर्ष एटीएस ने जिले में रह रहे रोगिग्या बांग्लादेशी नागरिक शाहिद को गिरफ्तार किया था। वह शहर स्थित कासिम नगर मोहल्ला मे परिवार सहित रह रहा था। वह उन्नाव के एक स्लाटर हाउस में मजदूर सप्लाई करता है। सवाल इस बात का उठता है कि मजदूर सप्लाइ्र्र का काम करने वाला गिरफ्तार युवक शाहिद स्वयं बांग्लादेशी नागरिक था। चोरी से यहां पर रहकर मजदूूर सप्लाई का काम करता था। ऐेसे में उसकेे द्वारा सप्लाई किए जाने वाले मजदूर जाहिर सी बात रोहिग्यां भी हो सकते है। ऐसे में बांग्लादेशी नागरिकों को काम मिल जाने की सूरत में यहां पर रहने व खाने दोनो की व्यवस्था सुलभता हो जाती है। आम तौर पर सुना जाता है कि स्लाटर हाउस में काम करने वाले वर्कर फैक्ट्र्री के ही क्वार्टर में रहते है। उनका निकलना भी प्राय: कम ही होता है। ऐसे में सोचने वाली बात ये है कि अगर ऐसा सच है तो इससे महफूज स्थान रोहिग्या के लिए और क्या हो सकता है। बता दें कि एटीएस ने दो भाइयों को गिरफ्तार किया तो खुलासा हुआ कि रोहिंग्या की जड़ें जिले में भी जमने लगी हैं। शाहिद नाम का युवक जो कासिमनगर में किराए के मकान में रहता है, वह यहां के एक बड़े स्लाटर हाउस में मजदूर सप्लाई करता था। बताया जा रहा है कि बांगलादेश से भागकंर आए 16 सौ लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे हैं। एटीएस इन लोगों की तलाश में लगी है। इधर भैंस कांड के बाद चर्चा में आई दही चौकी स्थित इण्डाग्रो स्लाटर हाउस में काम करनेे वाले नेपाली, कश्मीरी सहित विभिन्न प्रांतों के नागरिकों का वैरीफिकेशन करने में पुलिस न जाने क्यों ढील बरत रही है। बात अगर इंडाग्रो की करे तो यहां पर जम्मूकश्मीर के लगभग 45 श्रमिक कार्यरत है। इतना ही नही अन्य सीमावर्ती प्रांत के श्रमिक भी यहां पर काय्र्र करते है। चर्चा ये तक है कि यहां पर काम करने वाले अधिकांश श्रमिक तो पाकिस्तान सीमा से लगे जम्मू कश्मीर क्षेत्र के निवासी बताए जाते है। लेकिन पुलिस इतने संवेदनशील मामले में भी न जाने क्यों कोताही बरत रही है। वैरीफिकेशन के मामले में जब कप्तान दिनेश त्रिपाठी से संपर्क किया गया तो फोन उनकेे पीआरओ ने उठाया और साहब के बिजी होने की बात कही। फ्री होने पर बात कराने की बात कही।
