Friday, October 16, 2026
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ईपीएफओ का बड़ा फैसला, नॉमिनी को भी मिलेंगे ये फायदे, नौकरी बदलने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली

कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन ने एक अहम सर्कुलर जारी करते हुए नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों को बड़ा फायदा दिया है। श्वक्कस्नह्र के इस नए फैसले के तहत अब वीकेंड या सरकारी छुट्टियों के कारण नौकरी के बीच आया अंतर सर्विस ब्रेक नहीं माना जाएगा। इससे खासतौर पर डेथ क्लेम और बीमा से जुड़े मामलों में होने वाले विवादों पर रोक लगेगी।
छुट्टियों की वजह से नहीं टूटेगी सर्विस
श्वक्कस्नह्र ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी एक संस्थान छोड़कर दूसरी जगह नौकरी जॉइन करता है और इस बीच केवल शनिवार, रविवार या कोई घोषित अवकाश आता है, तो इसे सर्विस में ब्रेक नहीं माना जाएगा। पहले ऐसे कई मामले सामने आए थे, जहां वीकेंड के कारण सर्विस को टूटा हुआ मान लिया गया और कर्मचारियों के परिवारों को बीमा व पेंशन लाभ से वंचित रहना पड़ा।
क्यों लिया गया यह फैसला
श्वक्कस्नह्र के अनुसार, कई मामलों में कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनके परिजनों का एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (श्वष्ठरुढ्ढ) क्लेम सिर्फ कुछ दिनों के अंतर की वजह से खारिज कर दिया गया या कम राशि दी गई। कई बार सर्विस की गणना में तकनीकी खामियों के कारण आश्रितों को नुकसान उठाना पड़ा। इन्हीं गड़बड़ियों को दूर करने के लिए यह नया सर्कुलर जारी किया गया है।
लगातार सर्विस की नई परिभाषा
अब यदि किसी कर्मचारी की एक नौकरी खत्म होने और दूसरी नौकरी शुरू होने के बीच केवल वीकली ऑफ, नेशनल हॉलीडे, गजटेड हॉलीडे, स्टेट हॉलीडे या रिस्ट्रिक्टेड हॉलीडे आते हैं, तो उसे लगातार सर्विस माना जाएगा। श्वक्कस्नह्र ने यह भी साफ किया है कि नौकरी बदलते समय यदि अधिकतम 60 दिनों तक का अंतर होता है, तब भी सर्विस को कंटिन्यूअल माना जाएगा।
श्वष्ठरुढ्ढ क्लेम में परिवारों को बड़ी राहत
श्वक्कस्नह्र ने श्वष्ठरुढ्ढ स्कीम के तहत मिलने वाली न्यूनतम राशि को बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया है। अब यह न्यूनतम भुगतान नॉमिनी या कानूनी वारिस को तब भी मिलेगा, जब कर्मचारी ने लगातार 12 महीने की सर्विस पूरी न की हो या उसके पीएफ खाते में औसत बैलेंस 50,000 रुपये से कम हो।
किन मामलों में लागू होगा नया नियम
नया नियम उन मामलों में भी लागू होगा, जहां कर्मचारी की मृत्यु उसके आखिरी पीएफ योगदान के छह महीने के भीतर हो जाती है, बशर्ते वह कर्मचारी नियोक्ता के रिकॉर्ड में दर्ज हो। इससे अब परिवारों को बीमा क्लेम के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया और अनावश्यक विवादों से राहत मिलेगी।

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