कोरोना में आयुर्वेद के प्रति अटूट विश्वास बढ़ा: कुलपति
हरिद्वार। उत्तराखंड आयुर्वेद विवि के कुलपति डॉ. सुनील जोशी ने कहा कि कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी में सम्पूर्ण विश्व में आयुर्वेद के प्रति अटूट विश्वास बढ़ा है। यदि हम अपनी चिकित्सा सेवा के सभी पद्धति मिलकर जनमानस को स्वस्थ्य रखने के लिये एक साथ काम करेंगे तो किसी भी बड़ी से बडी बीमारी का सही और समय से इलाज कर पायेंगें। ये बात उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दौरान कही। उत्तराखण्ड आयुर्वेद विवि एवं हेमवती नन्दन बहुगुणा चिकित्सा विवि के संयुक्त तत्वाधान में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की शुरुआत ऋषिकुल में हुई। हेमवती नन्दन बहुगुणा चिकित्सा विवि के कुलपति प्रो. डॉ. हेमचन्द्र पाण्डेय ने कहा कि इस सेमिनार के माध्यम से सम्पूर्ण भारत में एक अच्छा सन्देश पहुंचाने का है। कहा कि प्राचीन चिकित्सा पद्धति एवं आधुनिक ऐलौपैथ चिकित्सा पद्धति एक साथ मिलकर एक ही प्लेटफार्म में काम करेंगे। संयुक्त रूप से एक दूसरे के सहयोग से अपनी अपनी पद्धति का ज्ञान का आदान प्रदान कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि सभी प्रतिभागियों के लिये लाइव डिटैक्सन डिमोन्स्ट्रैसन की जो व्यवस्था इस सेमिनार में की जा रही है यह अपने आप में अनूठी पहल है। जिसके माध्यम से छात्र-छात्राओं को ज्ञान अर्जित होगा। उसका लाभ उनके शिक्षण जीवन में हमेशा रहेगा। आयोजन सचिव शरीर रचना विभागाध्यक्ष प्रो. नरेश चौधरी ने बताया कि सेमिनार के माध्यम से मृत मानव शरीर के डिसेक्सन (शव-छेदन) द्वारा सभी प्रतिभागियों को सम्पूर्ण शरीर का विशेष रूप से ज्ञानार्जन कराया जाएगा। इस दौरान देश के विभिन्न प्रदेशों के अतिरिक्त नीदरलैण्ड, स्विजरलैण्ड एवं स्पेन से भी प्रतिभागियों ने भी विशेष रूप से प्रतिभाग किया। जापान से भी तीन प्रतिभागी इस सेमिनार में सम्मिलित होंगें।
