क्रूड कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट का साल
नई दिल्ली
पिछले साल क्रूड की कीमत में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल में ब्रेंट क्रूड जहां 20 साल के निचले स्तर तक पहुंच गया, वहीं अमेरिकी बेंचमार्क का प्रति बैरल भाव शून्य से 40.32 डॉलर नीचे तक आ गया था, जो इसके इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया था। क्रूड के भाव में इतनी भारी गिरावट के बाद भी आम आदमी के जीवन को प्रभावित करने वाले पेट्रोल और डीजल के भाव में गिरावट नहीं आई, बल्कि यह बढ़ ही गई है। क्रूड प्राइस में ऐतिहासिक गिरावट का लाभ पेट्रोल-डीजल उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाने का मूल कारण है देश का पेट्रोलियम टैक्स स्ट्रक्चर। ब्रेंट क्रूड का भाव आज भी प्री-कोविड स्तर से नीचे चल रहा है, लेकिन भारी भरकम टैक्स के कारण पेट्रोल-डीजल का भाव प्री-कोविड स्तर से ऊपर जा चुका है। तीन महत्वपूर्ण तिथियों के प्राइस को लेकर इसे सरलता से समझा जा सकता है। 30 दिसंबर 2019 को भारत वह वैश्विक स्तर पर कोरोनावायरस महामारी को कोई खास असर नहीं दिख रहा था। उस दिन ब्रेंट क्रूड 68 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रहा था। उस दिन दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 75.04 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 67.78 रुपए प्रति लीटर थी। 21 अप्रैल को प्रति बैरल भाव शून्य से 40.32 डॉलर नीचे चला आया था और ब्रेंट क्रूड 15.98 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। उस दिन दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 69.59 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 62.29 रुपए प्रति लीटर थी। उस दिन 30 दिसंबर 2019 के मुकाबले ब्रेंट क्रूड के प्राइस में 76 फीसदी से ज्यादा की कमी आई, लेकिन पेट्रोल के प्राइस में महज 7.26 फीसदी और डीजल के प्राइस में महज 8.1 फीसदी की कमी आई।
