इंदौर में एक लाख संपत्तियां लगा रही हैं खजाने में सेंध
इंदौर।
आर्थिक संकट से जूझ रहे नगर निगम के खजाने को महकमे के ही राजस्व अधिकारी सेंध लगा रहे हैं। मामले में गत दिवस दो राजस्व अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई। विशेषज्ञों की मानें तो ऐसी संपत्तियों की संख्या एक लाख से अधिक है। बहरहाल, निगमायुक्त के आदेश पर जारी संपत्तियों की बारीक जांच में अब तक 16 हजार से अधिक ऐसी संपत्तियां सामने आई हैं जिनके संपत्ति कर खातों में गड़बड़ है। इन संपत्तियों की संपत्ति मालिकों के सामने दोबारा से जांच होगी। नगर निगम ने कोरोना काल के बाद जल कर, संपत्ति कर और अन्य करों की राशि वसूली का अभियान बंद कर रखा था, लेकिन इन दिनों राजस्व विभाग की पूरी टीम को सर्वे के कार्य में लगा दिया गया है। इंदौर में 5.80 लाख संपत्ति कर खाते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इनमें से तकरीबन एक लाख से अधिक ऐसे संपत्ति कर खाते हैं जिनमें संपत्ति का क्षेत्रफल जानबूझकर के कम दर्शाया गया है ताकि संपत्ति कर कम चुकाना पड़े। वहीं 50 हजार से अधिक ऐसी संपत्तियां भी हैं जिनका खाता बरसों पहले खुला था लेकिन उन्हें अपडेट नहीं किया गया। इस दौरान संपत्ति का विस्तार दो से तीन गुना हो चुका है। तंगी से परेशान नगर निगम हर बार संपत्ति कर खातों की समीक्षा करता है। तीन साल पहले भी खातों की समीक्षा की थी। तब 15 हजार से अधिक संपत्तियों में गड़बड़ मिली थी। जिन्हें नोटिस दिया गया था। गड़बड़ सेटेलाइट सर्वे में सामने आई थी। इन नोटिसों पर पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन ने थोड़ी राहत दिलवाई थी। कुछ दिन पहले भी लगातार मिल रही शिकायतों पर निगम ने मैदानी अमले से जांच कराई। इस जांच में 16 हजार से अधिक खातों में गड़बड़ मिली है। जांच अपर आयुक्त भव्या मित्तल के निर्देश पर जारी है। सभी 19 जोनल कार्यालयों के राजस्व अधिकारियों की टीम सुबह स शाम तक अलग-अलग प्रकरणों की छानबीन कर रिपोर्ट भेज रही है। टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि शिक्षण संस्थाओ, व्यवसायिक केंद्रों, बड़े मॉल, हास्पिटल, महंगे मुख्य मार्ग पर बने शोरूम के साथ-साथ नामचीन मल्टियों की छानबीन करें और वहां की गई छानबीन की रिपोर्ट भी मुख्यालय प्रतिदिन भेजें। इस आधार पर टीमें अलग-अल क्षेत्रों में कार्रवाई कर रोज रिपोर्ट भेज रही हैं। टीमें किसी भी संस्थान पर जाकरवहां पहले अपने स्तर पर छानबीन कर लेती हैं और फिर अपने रिकॉर्ड में उसकी पड़ताल होती है। कुछ अनजान मगर कई टैक्स बचाने जानबूझकर छुपाई जानकारी – ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं होता कि मकान में अतिरिक्त निर्माण के बाद इसकी जानकारी नगर निगम को देना जरूरी रहता है। कुछ लोग जानबूझकर राजस्व विभाग की अतिरिक्त निर्माण की जानकारी नहीं देते हैं। निगम के कई अफसर भी मिलीभगत कर कम निर्माण दिखाकर कम टैक्स लेते हैं। राजस्व वसूली में इसी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर बीते दिनों पांच अफसरों पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। टैक्स दो दशक पुराने असेसमेंट से ही … फीबे कंपाउंड, छोटी ग्वालटोली, बस स्टेंड के आसपास वर्षों से असेसमेंट हुआ ही नहीं। दो दशक पुराने असेसमेंट के आधार पर ही संपत्ति कर लिया जा रहा है जबकि इस दौरान क्षेत्र में कई पुराने निर्माणों ने आसमान छू लिया है। कई बड़ी संपत्तियों में फ्लोर छूटे हुए हैं। इनमें होटलें भी शामिल हैं। मौके पर आवासीय का टैक्स भरा जा रहा है, लेकिन वहां व्यवसायिक गतिविधियां न केवल चल रही हैं, बल्कि दुकानें संचालित हो रही हैं। कई बड़े संस्थानों में कम क्षेत्रफल बताकर टैक्स चोरी की जा रही है और मौके पर अत्याधिक क्षेत्रफल मिला है। संपत्ति कर में असेसमेंट पुराना है। खाता खुलने के बाद संपत्ति कर खाते में दर्ज नहीं। कई ऐसी संपत्तियां हैं जिनका खाता ही नहीं खोला गया।
