Friday, October 16, 2026
UTTAR PRADESH

पोस्ट कोविड मरीजों में फंगस का हमला

कानपुर 

कोरोना संक्रमित मरीजों में स्टेरॉयड और एंटी बायोटिक के अत्यधिक सेवन के दुष्परिणाम फंगल इंफेक्शन के रूप में सामने आ रहे हैैं। हैलट के न्यूरो साइंस कोविड अस्पताल और कोविड मेटरनिटी विंग में भर्ती कुछ मरीजों में ये समस्या दिखी। इसे म्यूकॉरमाइकॉसिस (काली फफूंदी) कहते हैं।
दरअसल, इंटेंसिव केयर यूनिट (आइसीयू) और ऑक्सीजन पर लंबे समय तक रहने वाले मरीजों पर कई तरह के फंगस के हमले होने की आशंका रहती है। फंगस की अधिकता पर रोगी के मॉस्क के चारों ओर या फिर दाढ़ी वाले हिस्से में काले धब्बे पड़ जाते हैं। यह संक्रमण की निशानी है। इसमें मिलने वाले यूवीक्यूटस (हर जगह पाए जाने वाले) फंगस नाक, गले से होते हुए श्वसन क्रिया के माध्यम से खून में मिल जाते हैं। यह खून से होते हुए आंख और दिमाग तक पहुंच जाते हैं। इसमें जहां आंखों की रोशनी प्रभावित होती है, वहीं पैरालिसिस का खतरा रहता है। प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होने से लिवर और हार्ट भी खतरे में आ जाते हैैं।
न्यूरो साइंस कोविड अस्पताल के नोडल अधिकारी प्रो. प्रेम सिंह ने बताया कि म्यूकॉरमाइकॉसिस की समस्या पोस्ट कोविड मरीजों में देखने को मिली है। उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई है, लेकिन घर जाने पर उनको खांसी, सांस फूलना और अन्य तरह की दिक्कतें हो रही हैं। इसमें बलगम काले रंग का आता है। रोगी को बेचैनी होने लगती है। सीने में दर्द की समस्या रहती है।
न्यूरो साइंस कोविड अस्पताल के आइसीयू इंचार्ज प्रो. अनिल वर्मा ने बताया कि म्यूकॉरमाइकॉसिस समेत अन्य फंगस और बैक्टीरिया का हमला कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता की वजह से होता है। कोविड पॉजिटिव रोगियों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर रहती है। इसके अलावा स्टेराइड्स और एंटी बायोटिक की अधिकता की वजह से भी फंगल इंफेक्शन बढ़ रहा हैं। हालांकि रोगियों को एंटी फंगल दवाएं भी दी जा रही हैं।

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