गांव गांव बिछी हैं चारपाई, कोह में कोहराम, अभी भी बेखबर हैं जिम्मेदार! -बदहाल ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की फिर खुली पोल
मथुरा
फरह ब्लॉक के तीन गावों में कई लोगों की मौत की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इन गांवों में डेरा डाल दिल दिया है। सोमवार से विभाग हरकत में आया है जबकि इन गांवों में बीमारी पहले ही फैल चुकी थी। चार दिन में आठ मरीजों की मौत के बाद हकरत में आए स्वास्थ्य विभाग ने आनन फानन में कुछ इंतजाम किए हैं। अगर समय रहते उचित इलाज की व्यवस्था हो जाती तो इन मौतों को रोका जा सकता था। गांव पहुंचे उप जिलाधिकारी संजीव वर्मा एवं मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रचना गुप्ता व अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. दिलीप कुमार आदि को ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पिछले आठ-दस दिन से बुखार का प्रकोप है। चार दिन में आठ बच्चों की इस जानलेवा बुखार से मौत हो चुकी है। वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना दिए जाने के बावजूद प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाया। फरह ब्लॉक के कोह सहित आसपास के तीन गांवों में हुईं इन मौतों के बाद जिला प्रशासन कुछ इस तरह दिखा रहा है कि वह सतर्क हो गया है, लेकिन हकीकत यह नहीं हैं। गांव गांव बीमारों की चारपाई बिछी हुई हैं। यहां वहां जैसे तैसे लोग अपना इलाज करा रहे हैं। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का ग्रामीण क्षेत्रों में बुरा हाल है। गांवों में बीमार लोग झोलाछाप चिकित्सकों से कई दिन तक इलाज करा रहे हैं। हालत तबगडने पर शहर की ओर मजबूरी में भाग रहे हैं। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति है। गांव के 40 प्रतिशत लोग बीमारी से जूझ रहे हैं। प्रत्येक घर में तीन-चार चारपाई बिछी हुई हैं। टिंकू पुत्र हरि सिंह (9), रुचि पुत्री भगवान सिंह (14) व हनि पुत्री वेदप्रकाश (5) ने सोमवार को बीमारी के कारण दम तोड़ दिया। गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पहुंच गई। टीम बीमार बच्चों का इलाज करने में जुट गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बुखार आता है और बच्चों का बदन नीला पड़ जाता है। इलाज से पहले ही अगले 20-25 मिनट में दम तोड़ देते हैं। गांव में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। नालियां चोक पड़ी हैं। गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। आशंका है कि कहीं यह बीमारी गंदगी के कारण तो नहीं। गांव के नंदकिशोर के परिवार के चार लोग आगरा के अस्पताल में भर्ती हैं।
