पोषण की थाली सस्ती करने के लिए महिलाएं करेंगी खेती
भोपाल।
आंनबाड़ी केंद्रो को ठेकेदारों से सस्ता पोषण-आहार उपलब्ध कराने मे महिला स्व-सहायता समूह फिर सरकार की मदद करेगी। मध्य प्रदेश राज्य आजीविका मिशन पोषण आहार तैयार करने के लिए जरूरी व कच्चा माल (मंूगफली, गुड़, गेहूं सहित अन्य अनाज) स्थानीय स्तर पर समूह की महिलाओं से खरीदने की तैयारी कर रही है। इसके लिए प्रदेशभर में सर्वे कराया जाएगा। सर्वे से यह पता चलेगा कि किस जिले या क्षेत्र में किस फसल की ज्यादा पैदावार होती है। वहां समूह की महिलाएं फसल उगाएंगी और पोषण आहार संयंत्र चलाने वाले परिसंघ फसल खरीदकर संयंत्रों केा देंगे। इसके लिए कांट्रेक्ट खेती (फसल पैदा करने के लिए आर्थिक मदद) भी देने पर विचार चल रहा है। इस प्रयास से समूह की महिलाओं की आमदनी तो बढ़ेगी ही, उनहें सस्ते में फसल बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। मिशन फसल के भंडारण की भी तैयारी कर रहा है। मध्यप्रदेश में तीन लाख 33 हजार स्व-सहायतासमूह हैं। इनमें 35 लाख से ज्यादा परिवार जुड़े हैं। इनमें से सैंकड़ों महिलाओं के पास आधा से पांच एकड़ के खेत भी हैं। जिनमें वे क्षेत्रवार फसल पैदा करती हैं, पर भंडारण की सुविधा न होने के कारण वे फसल को ज्यादा दिन तक नहीं रख पाती और तुरंत ही औने-पौने दामों में बेचना पड़ता है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान होता है। वही पोषण आहार के लिए बाजार से सामान खरीदना पड़ता है, जो महंगा भी मिलता है और मिलावट की भी पूरी आश्ंाका रहती है। इस स्थिति को देखते हुए आजीविका मिशन स्थानीय स्तर पर कच्चा माल खरीदने पर विचार कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसा करने से जहां पोषण आहार के लिए शुद्ध सस्ता कच्चा माल मिल जाएगा, वहीं समूह की महिलाओं की आमदनी भी बढ़ेगी, क्योंकि उन्हें अपने फसल कम कीमत पर बेचनी नहीं पड़ेगी। कुछ मामलों में आजीविका मिशन समूह की महिलाओं से कांट्रेक्ट खेती भी कराएगा। उन्हें अलग-अलग फसल उगाने के लिए पहले आर्थिक मदद दी जाएी और फसल तैयार होने पर खरीद ली जाएगी। कोशिश यह है कि महिलाओं को फसल बेचने के लिए कहीं जाना ही ना पड़े। गेहूं, दाल, गुड़, मूंगफली सहित अन्य खाद्य पदार्थ स्थानीय स्तर से मिलने के बाद आजीविका मिशन चीनी-तेल का इंतजाम भी स्थानीय स्तर पर करने की कोशिश करेगा। वर्तमान में कुछ समूह तेल का उत्पादन कर रहे हैं, पर यह काफी महंगा है। इसलिए अभी नहीं लिया जा सकता है। वहीं चीनी कोई भी समूह तैयार नहीं करता है। इसका इंतजाम बाद में करने की कोशिश होगी। सरकार ने प्रदेश में सातों पोषण आहार संयंत्र समूहों से चलवाने का निर्णय लिया है। समूह देवास संयंत्र इसी माह संभाल लेंगे। इसके बाद धार संयंत्र में उत्पादन शुरू करेंगे।
