Friday, October 16, 2026
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लखनऊ में समाज कल्याण विभाग का करोड़पति बाबू नघ्किला घोटाले का राजा

लखनऊ

आर्थिक रूप से कमजोरों की मदद करने वाले समाज कल्याण विभाग का एक बाबू घोटाले के राजा के रूप में सामने आया है। लखनऊ के जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में तैनात बाबू की इस पहचान के साथ ही अधिकारियों के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। जब पता चला कि वह करोड़ पति है। राजधानी में करोड़ों की चल-अचल संपति बनाने वाले इस करोड़पति बाबू के बारे में शासन को जानकारी हुई तो मामले की जांच शुरू हो गई।
प्राथमिक जांच में पता चला है कि लखनऊ के पिकनिक स्पॉट रोड पर करोड़ों का बंगला है और गोमतीनगर में करोड़ों की एजेंसी भी बेटे के नाम से खोली है। जांच अभी शुरू ही हुई थी कि समाज कल्याण निदेशालय के बड़े अधिकारियों की नींद उड़ गई है। मामले को दबाने की जुगत में लगे अधिकारी अब बाबू को बचाने के नाम पर खुद की गर्दन बचाने की जुगत में लग गए हैं।
500 करोड़ का हुआ था घोटालारू शुल्क प्रतिपूर्ति में 2010-11 और 2012-2014 के बीच लखनऊ समेत यूपी में 500 करोड़ का शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाला हुआ था। प्रदेश के कई अधिकारियों को घोटाले के आरोप में जेल जाना पड़ा था। लखनऊ में शुल्क प्रतिपूर्ति के घोटाले में बाबू का नाम आया था। 26 मार्च 2013 में जांच के आदेश के साथ ही 10 दिसंबर 2013 को विशेष ऑडिट में घोर अनियमितता मिली थी। निदेशालय की ओर से हुई जांच में 13 जनवरी 2014 को बाबू दोषी पाया गया। तत्कालीन वित्त नियंत्रक ने पांच जून 2014 को अपने आदेश में कार्रवाई की बात कही थी। खुद की गर्दन फंसता देख अधिकारी मामले को दबाए हुए थे। एक बार फिर प्रमुख सचिव समाज कल्याण बीएल मीणा ने उप निदेशक समाज कल्याण श्रीनिवास द्विवेदी को जांच करके रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। आरोपित बाबू विश्वविजय सिंह से जब इस बारे में उनका पक्ष पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

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